Friday, April 29, 2011

दिल की मिट्टी


दिल की मिट्टी थी नरम,
जब तूने रखा पाँव,
अब हस्ती मेरी पथरा गयी
बाकी रहा तेरा निशान,
जब ख्वाब में देखा तुझे कल,
एक दर्द उभर आया,
बस यूँ ही...

AnSh :)

Tuesday, April 26, 2011

अहसास


कभी न बोलना भी बहुत कुछ कह देता है
और कभी शोर भी खामोश सा होता है ,
हर वक्त एक आह्ट का इंतज़ार होता है ,
शायद ये अहसास भी होता है,
बस यूँ ही......

Thursday, April 14, 2011

कुछ टुकड़े कागज़ के


जब मन भी बोझ से दब जाता,
बारिश होती इन आँखों से,
सब छोड़ मैं तन्हाँ खो जाऊ,
खामोशी की शालाखों में,
नींद दर्द को कब आये,
मैं जीता हूँ बस यूँ ही,
कागज़ के इन टुकडों पर,
लिखता रहता हूँ बस यूँ ही...


-AnSh :)

यह बस यूँ ही पर सबसे पहले पोस्ट हुआ था :)

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