Not everything happens for a reason,
few things happens with no specific reasons,
for which we say
"ये हो गया बस यूँ ही"
:)
Thursday, April 14, 2011
कुछ टुकड़े कागज़ के
जब मन भी बोझ से दब जाता,
बारिश होती इन आँखों से,
सब छोड़ मैं तन्हाँ खो जाऊ,
खामोशी की शालाखों में,
नींद दर्द को कब आये,
मैं जीता हूँ बस यूँ ही,
कागज़ के इन टुकडों पर,
लिखता रहता हूँ बस यूँ ही...
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